अपराधमुक्त हो राजनीति

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अपराधमुक्त हो राजनीति

प्रसिद्ध राजनेता लालू यादव को जेल की खबर पर आम लोगों में ख़ुशी है और न्याय पर विश्वास पुनः कायम हुआ है । शहाबुद्दीन के बाद लालू यादव को जेल की सजा पर बिहार राजनीतिक अपराधीकरण से मुक्ति का जश्न मना रहा है । मगर फिर भी लोगो को मलाल है कि न्याय में देरी हुई है । लालू अबतक अपनी राजनीतिक पारिया आराम से खेलते आ रहे थे । मुकदमा दायर होने से बेल मिलने तक अप्रत्यक्ष रूप से राजनीति में सक्रिय भूमिका में रहे । पहले वे फिर उनकी धर्म पत्नी और बाद में उनका बेटा राजनीति में परिवार वाद को लेकर आगे बढ़ा। और अब लालू यादव पूरा परिवार सेटल करने के बाद वृद्धावस्था में जेल की सजा काटेंगे। हालाँकि भष्टाचार के लिये उनको ये दंड बहुत पहले ही मिल जानी चाहिये । मगर भारत की राजनीति में किसी भी राजनीतिज्ञ को बहुत जल्दी सजा नहीं दी जा सकी है उसका कारण है न्याय व्यवस्था में देरी,भष्टाचार तथा अनियमितता ।
इसी के मद्दे नज़र अभी सुप्रीम कोर्ट ने 12 स्पेशल कोर्ट बनाने का आर्डर दिया है । लगभग 1050 नेताओं, विधयकों,पार्षदों से सम्बंधित विलंबित मामले अदालत में लंबित है । ऐसे मामलों को एक साल के  भीतर सुलझा लेने का प्रावधान होगा । अगर ऐसा होता है तो कोई भी दागी नेता हमारी राजनीति में ना रहकर जेल की सलाखों के भीतर रहेगा।
आज आलम ये है कि जबतक जुर्म साबित ना हो जाये, किसी को जेल नहीं होती और जुर्म के साबित होने या करने में कभी-कभी व्यक्ति का पूरा जीवन गुजर जाता है और मृत्यु के बाद फैसले आते है। न्याय की प्रक्रिया में यह देरी अपराधीकरण को बढ़ावा देता है तथा अपराधी को भयमुक्त माहौल देता है ताकि वह अपराध करे और परिणाम की चिंता ना करे । राजनीति में इसतरह के अपराधीकरण और भयमुक्त माहौल पैदा होने से लोकतंत्र को खतरा है । हमे जल्द से जल्द सुनिश्चित करना होगा की संसद जैसी पवित्र स्थल पर कोई दागी नेता ना पहुँचे और ना ही राजनीतिक संरक्षण में वह स्वमं या आम जनता के लिए कोई कानून पारित कर पाए  ।
साथ ही साथ हमे न्याय व्यवस्था को और सुदृढ़ कर उसे भ्रष्टाचार से मुक्त रखना होगा। देर से न्याय मिलना, न्याय ना मिलने के बराबर ही है । अतः फ़ास्ट ट्रायल कोर्टो का गठन, रिटायर्ड न्यायाधीशों को पुनः नियुक्ति तथा सुनवाई का अवसर प्रदान करना तथा प्रति केस भुगतान जैसे अवसरों के जरिये इस प्रक्रिया में तेज़ी लाई जा सकती है। साथ ही छोटे मोटे विवादों को छोटे स्तर पर ही सुनवाई और अंतिम फैसला को बढ़ावा देने के आलावा आम जनता को भी कम से कम विवादों में पड़ने और हर मामलों को अदालत में पहुँचाने से बचना चाहिए ताकि अदालत का वक्त तो बचे ही साथ ही उसका बोझ भी कम हो सके । कार्यपालिका और व्यवस्थापिका के बीच तालमेल बढ़ाने, लोकतंत्र की सुरक्षा करने और समस्याओं को हल करने का कार्य न्यायपालिका का है और आज न्यायपालिका काफी हद तक सुस्त और सीथिल नज़र आ रही है । अच्छे कानून और न्याय बहुत सारी समस्याओं को स्वतः ही समाप्त कर देते है । अतः अपराध करने का भय और समय पर न्याय पाने का अधिकार न्यायपालिका हम सबको देती है अतः उसको दुरुस्त रखना आज के युग में नितान्त आवश्यक है ।
आज राजनीति में कई सारी समस्याएं है और राजनीति में अपराधी प्रवृति के लोगों की भरमार होती चली जा रही है। ऐसे में ना सिर्फ ऐसे लोगों को राजनीति से दूर रखना होगा बल्कि ऐसे लोगो को राजनीति में आना होगा जो वाकई में समाज सेवा का इरादा रखते हो ।
बड़ी विचित्र बात है कि किसी भी सरकारी परीक्षा के लिए हमारा दागदार होना हमारी अहर्ता है जबकि राजनीति में प्रवेश या देश चलाने के लिए ऐसी कोई अहर्ता निश्चित नहीं है । वर्तमान समय में ज्यादातर नेता वकालत की डिग्री लिए अधिकाशतः विभाग संभाल रहे है । यह कैसा न्याय है कि आज एक युवा को नौकरी के लिए उस नौकरी से सम्बंधित योग्यता एवं अहर्ता अनिवार्य है जबकि नेताओं के लिए ऐसी कोई अहर्ता नहीं है । कोई भी नेता ऊर्जा विभाग, सूचना विभाग, जल एवं पर्यावरण विभाग या अन्य कोई विभाग बिना किसी विशेष योग्यता तथा अनुभव के संभाल सकता है जबकि एक आशुलिपिक बनने के लिए इंटरमीडिएट या स्नातक के साथ टंकण दक्षता 60 से 80 और कभी-कभी अनुभव की भी माँग की जाती है । क्या अब यह सुनिश्चित नहीं होना चाहिए कि नेताओं का भी विभाग अनुरूप योग्यता तथा अनुभव होना चाहिए और समाजसेवा जैसे विषयों वाले लोगों को प्राथमिकता देनी चाहिये ।
सभी जानते है कि आज नेताओं में समाजसेवा भाव  का आभाव है । नेता देश की नौकरी करते है और वेतन पाते है और बाकि जनता प्राइवेट या सरकार का काम करती है और वेतन पाती है । तो ये भेदभाव क्यों ? भेदवाव खत्म करके हम समानता ला सकते है और राजनिति को भी स्वच्छ भारत अभियान का हिस्सा बना सकते है।सर्व शिक्षा तथा उच्च शिक्षा का असर सर्वप्रथम राजनीति में पालन किया जाना चाहिए । देश में शिक्षा के विकास का प्रभाव राजनीति में भी दिखना चाहिए। वहाँ भी उच्च शिक्षित तथा रिसर्च स्कॉलर की पहुँच  सुनिश्चित हो,ताकि देश विज्ञान तथा अनुसंधान की दिशा में आगे बढे और पर्यावरण सुरक्षा और प्रदुषण जैसी समस्याओं से निपटने के नए विकल्प तैयार हो ।
यहाँ तो अनुसंधान करने वाले युवा आतंकवादी बन रहे है और आपराधिक लोग नेता ऐसे देश का विकास सकरात्मक दिशा में कैसे होगा ?
उद्देश्य सिर्फ ये है कि अच्छे, दक्ष,पढ़े लिखे और बेहतर अनुभवी लोग राजनीति में आये और दागी लोगों को जल्द से जल्द सज़ा मिल सके ताकि वो सलाखों के पीछे हो तब शायद भारत की तस्वीर ऐसी होगी यक़ीनन कई गुना बेहतर होे सकेगी ।

शालिनी श्रीवास्तव
फ्रीलांस लेखिका तथा
पूर्व रिसर्च एसोसिएट
केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ
www.shalinisrivastav.com

Shalini Srivastava
Shalini Srivastava
I am a writer ,I write because writing is the thing I do best. I write because words live on me and inside of me. I write because I want to write.I write because I feel more. I write because I have got something to say. I write therefore I am a writer.

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