आजमाने के लिए…..

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आजमाने के लिए…..

कोई बात ही ना हो जैसे बताने के लिए,
वजह ढूंढते है लोग आज मुस्कुराने के लिए |
क्या दुश्मनी है मेरी तुझसे आज बता दे,
मैं ही थी क्या अकेले चोट खाने के लिए |
तुम्हे अंदाज़ा भी नहीं कि हमे हुआ क्या,
बहुत रोना पड़ा किसी को हँसाने के लिए |
जो दिल के सच्चे है,उनकी आखों में झाँक,
हर कोई तो होता नहीं आजमाने के लिए |
चैन से सोते हो तुम अपने घर में महफूज़,
तलाशती हूँ घर कोई रात बिताने के लिए |
दिल अपना भी बिलकुल तुम्हारी तरह है,
कठोर तो हूँ बहुत ,मगर ज़माने के लिए |
कुछ अहसास दफन है दिल के भीतर ही,
हर चीज़ तो होती नहीं दिखाने के लिए |

 

शालिनी श्रीवास्तव

पूर्व रिसर्च एसोसिएट

केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान लखनऊ तथा

लेखिका

Shalini Srivastava
Shalini Srivastava
I am a writer ,I write because writing is the thing I do best. I write because words live on me and inside of me. I write because I want to write.I write because I feel more. I write because I have got something to say. I write therefore I am a writer.

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