घोटालेबाज़ होगा पुरस्कृत….

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घोटालेबाज़ होगा पुरस्कृत….

अभी हाल में झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा,तत्कालीन कोयला सचिव के साथ दो अफसरों को सीबीआई की विशेष अदालत ने दोषी करार दिया । इस खबर को देखकर लगा कि नेता और घोटाला का पुराना पारंपरिक रिश्ता है । क्योंकि वर्तमान परिदृश्य में बिना घोटाला किये किसी भी व्यक्ति का नेता बन जाना बिल्कुल असंभव सा प्रतीत होता है और हम इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते । क्योंकि घोटालाविहीन नेता वाली परिकल्पना को वास्तविकता से किसी ने जोड़ा नहीं और हमने इसे जुड़ने भी नहीं दिया । वैसे इस प्रथा को आगे बढ़ाने में छोटे, बड़े, मध्यम दर्जे के अमूमन सभी नेताओं, विधायको,पार्षदो तथा नौकरशाहों का आमूलचूल योगदान रहा है। चारा घोटाला से लेकर टू जी स्पेक्ट्रम  तक घोटालों की सूची का अंत नहीं है । और इस कार्यक्रम को शीर्ष तक ले जाने में लगभग सभी नेताओं ने जीतोड़ लगन और मेहनत का परिचय दिया है । आलम ये है कि अब घोटालों के उजागर होने या अख़बारों में इस तरह की सुर्ख़ियों पर हमारे भीतर कोई नकारात्मक प्रतिक्रिया या बहुत अधिक आक्रोश उत्पन्न नहीं हो पाता । बल्कि जनमानस में यह कृत्य अत्यंत  सहज भाव से स्वीकृत कर लिया जाता है और अगले ही पल विस्मृत भी दिया जाता है। और मान लिया जाता है कि घोटाला करना नेताओं और नौकरशाहों का जन्म सिद्ध अधिकार है ।
लोकतंत्र की इससे बड़ी उपलब्धि भला और क्या हो सकती है कि जहाँ नेताओं को दो -चार घोटालों की बड़ी आसान छूट हो, अपशब्द कहने की कोई सीमा ना हो और तो और आरोप-प्रत्यारोप में आम आदमी से लेकर न्यायपालिका तक सबको घसीट लिया जाये । समानता का ऐसा उदहारण और कहाँ मिलेगा जहाँ सोशल नेटवर्किंग साइटों पर बड़े से छोटे सभी की निजता का उल्लंघन एक प्लेटफार्म पर एक साथ हो सके,साथ ही सभी को कुछ भी अनाब सनाब कहने की छूट हो।
और प्रतीत होता है कि घोटाला करना तो नेताओं का मौलिक अधिकार है और प्रतिक्रिया ना करना हमारा संवैधानिक कर्तव्य ।
राजनीति और नौकरशाही में उतरने वाले व्यक्तियों से दो चार घोपलो की अपेक्षा रखना आज के समय की माँग है ।
बिना इसके नेता को नेता कहना अशुभ सा लगेगा ।
तत्कालीन समय को देखते हुए अपराध, घोटाला और चापलूसी नेताओं के ये तीन मौलिक,भौतिक और अनिवार्य गुण निर्धारित है । इस हिसाब से राजनीतिक करियर में प्रवेश करने वाले लोगों को यह गुण धारण कर लेना चाहिए । जो की इस क्षेत्र की अनिवार्य अहर्ता है और इस पद की मूल माँग भी है । इसके साथ अगर बेतुका भाषण , असभ्य आचरण, गुण्डागर्दी, ऐंठन , घोर भष्टाचारी होने के कौशल आपमें विदेमान है तब तो आपसे ज्यादा योग्य और काबिल कोई हो ही नहीं सकता नौकरशाही में या नेता बनने में । सुनिश्चित है किआप एक बेहतर घपलाबाज़ नेता व् नौकरशाह बन सकते है ।
वैसे कायदे से बड़ा घोटाला करने वाले राजनेताओं को हमे सम्मानित करना चाहिए । क्योंकि भारत की राजनीति में इसकी प्रथा काफी पुरानी है और हमने आजतक इस परंपरा को अनवरत भाव से जारी रखा है यह किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है  । यूनेस्को को कुम्भ की जगह घपलेबाजी की इस अति प्राचीन परंपरा को  शामिल कर लेना चाहिये ताकि इसको आगे तक ले जाने और संजोने में हमारा अथक प्रयास जारी रहे ।
चाहे तो इस काम को आगे ले जाने के लिए सरकार  एक संस्था का  निर्माण कर सकती है । साथ ही एक कमिटी हो जो सभी घोटालेबाज़ो की पहचान कर उनको राजनैतिक प्रोटेक्शन प्रदान कर सके साथ ही उनको पुरस्कार के लिए नामित  कर सके।
ऐसे लोकतंत्रात्मक देश में घपला करने की योग्यता रखने वाले नेताओं को उनकी क्षमता के अनुसार छोटे बड़े पुरस्कार देकर उनको और प्रोत्साहित किया जाना चाहिए ताकि उनका मनोबल बना रहे। और ख़बरों के प्रकाशन के बाद भी उनका काम और घपलेबाजी जारी रहे ।
साधारण तौर पर सर्कार या संस्था को बड़ा घपला करने वाले साहसी नेताओं और नौकरशाहों को बड़ा पुरस्कार और छोटे-मोटे घपलाबाज़ों को सान्त्वना पुरस्कार देने की घोषणा कर देना चाहिए और ऐसे महापुरुषों को अलंकारों  से नवाज़ा जाना चाहिये । क्योंकि आज राजनीति और नौकरशाही में जिस तरह का प्रचलन चल रहा है ,उसमे आज के नेताओं ने विकास किया है । जहाँ बिना घपला, घुसखखोरी और गुंडागर्दी के किसी चीज़ की कल्पना ही संभव ना हो तो ऐसे में बड़े से बड़ा नेता या नौकरशाह के रूप में चोर या घपलेबाज बनाने वालों का सम्मान किया जाना चाहिए । ऐसे में कुछ सम्मान मेरे नज़र में है जिसे सरकार चाहे तो सुझाव के तौर पर अपना सकती है मुझे इसमें व्यक्तिगत तौर पर कोई आपत्ति नहीं है । कुछ पुरस्कारों को जैसे:-
मैन कुकर घपलाबाज़ प्राइज़, टेबल घोटाला प्राइज़, फ़ाइल रोकू महाराज प्राइज़, पैसा खाऊ उबाऊ प्राइज़ , घुमाऊ-सरकाऊ लोकल अधिकारी पुरस्कार, घन लूट अधिकारी सम्मान , योजना घोटन अवॉर्ड, सूक्ष्म घपलाबाज़ प्राइज़
आदि नाम से जारी किया जा सकता है ।

शालिनी श्रीवास्तव
पूर्व रिसर्च एसोसिएट तथा मुक्त लेखिका
www.shalinisrivastav.com

Shalini Srivastava
Shalini Srivastava
I am a writer ,I write because writing is the thing I do best. I write because words live on me and inside of me. I write because I want to write.I write because I feel more. I write because I have got something to say. I write therefore I am a writer.

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